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गर्मी का मौसम

उफ़ ये गर्मी! और उफ़्फ़ ये गर्मी का मौसम! यहाँ से पसीना, वहाँ से पसीना। गर्मी के दिनों में लोगो को नहाने की जरुरत ही नहीं होती क्योंकि पसीने से आदमी वैसे ही बैठे-बैठे ही नहा लेता है। पर ये भी ऊपर वाले का हुनर देखिये, जो ठण्ड के दिनों में पानी को हाथ न लगाये वो सज्जन भी गर्मी में दो-दो तीन-तीन बार नहाते है। अब तो आप समझ गये होंगे की गर्मी का मौसम लोगो से क्या-क्या नही करवा सकता।

आखिर ये गर्मी और गर्मी का मौसम, है क्या बला? जीहाँ बला। आखिर सबकी चैन उड़ा ले जाने वाला ये चीज बला ही होगी।

“बसंत ऋतू के बाद जब सूर्य रूपी ‘Bulb’ का ‘Voltage’ अति ‘High’ से भी ‘High’ हो जाता है, तब पृथ्वी पर जरुरत से ज्यादा ऊर्जा पहुचने लगती है। जिससे बड़े-बड़े पेड़ जल के चारकोल हो जाते है। जंगलो में आग लग जाती है। नदियाँ प्यासी हो जाती है। इन्सान पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने लगता है, और गर्मी से बेहाल हो जाता है। पृथ्वी के इन लक्षणों को ही गर्मी का मौसम कहते है।”

कुछ सालो से मै देख रहा हूँ, मतलब महसूस कर रहा हूँ, की गर्मी ‘बैकग्राउंड सीजन(Background Season)’ बन गई है। जी-हाँ ‘Background Season’। अब आप कहेंगे ये ‘Background Season’ क्या होता है? अरे भाई! जैसे Mobiles और Computers में होता है, ‘Background Image’। ‘Background Image’ हमेशा स्क्रीन में रहता है।

जब कोई ‘program’ चलाओ, तो ‘Image’ आंशिक या पूर्ण रूप से ढँक जाता है। पर प्रोग्राम बंद होने पे वापस वही ‘Background Image’ दिखाई देने लगती है। ठीक वैसे ही, गर्मी ‘Background Season’ बन गया है। ठण्ड के मौसम में अगर ठण्ड ना हो, तो गर्मी। बारिश के मौसम में बारिश ना हो, तो गर्मी। यहाँ तक की गर्मी के मौसम में अगर गर्मी ना हुआ… ऐसा तो हो ही नही सकता।

समाचार चैनलों में रोज की मौसम खबर में बताते है की तापमान साल दर साल रिकॉर्ड तोड़ रही है। पहले 40 डिग्री था, जो अब बढ़के 50 डिग्री में पहुच चूका है। मुझे तो लगता है वो दिन दूर नही जब गर्मी के दिनों में तापमान 100 डिग्री हो जायेगा। लोगो का जीना इस कदर दुस्वार हो चूका है, की पंखा यहाँ तक की कूलर भी टिक नही पाता गर्मी के आगे। और तो और ‘टॉयलेट’ और ‘बाथरूम’ में भी ‘कूलर-पंखा’ लगाने की नौबत आ रही है।

गर्मी से पार होने का एक ही नैया दिखता है, AC और वो भी हर किसी के किस्मत में नही। हम जैसे गरीब लोग तो AC का सिर्फ नाम ले सकते है।  कभी-कभी सोचता हूँ, जब AC का निर्माण नही हुआ था, तब लोग गर्मी कैसे झेलते थे। हम मजदूरी करने वाले लोग तो फिर भी जैसे तैसे गर्मी सह लेते है। पर बढे घरानों में कोमल और नर्म शरीर वाले लोग कैसे रहते थे?

हमारे एक उस्ताद है, 90 पार। उनसे पता चला की पहले तो गर्मी होती नही थी,  आज जैसी। आज तो यो है की ऊपर वाला हमें जिन्दा भूंज डालना ही चाहता हो। जबसे उट-पटांग चीजे बनने लगी है तभी से गर्मी बढ़ी है। धन्य हो उस्ताद जी।

कुछ वैज्ञानिक बताते है की वायु प्रदुषण करके पर्यावरण को मनुष्यों ने इतना नुकसान पहुचाया है की धरती की ‘इको-सिस्टम’ को पूरा हिला डाला है, जिससे गर्मी बढ़ रही है। सुनने में तो ये भी आया था की 2050 तक मुम्बई और दुसरे समुद्र किनारे बसे शहर डूब जायेंगे।

साल दर साल धरती का वातावरण गर्म हो रहा है, जिससे धरती के ध्रुवो में जो बड़े-बड़े बर्फ के पहाड़ है पिघल रहे है। और उसका पानी समुद्र में भर रहा है। एक दिन जब सारे बर्फ पिघल जायेंगे पूरी धरती जलमग्न हो जायेगा। भई ये भी क्या खूब है, गर्मी बढ़ने के कारण हमारा धरती डूब जायेगा।

गर्मी का मौसम का लंगोटिया यार है, पानी की कमी। गाँवो में गर्मी के दिनों में तालाब सूख जाते है। ‘हैंडपंप’ पानी उगलना बंद कर देता  है। लोगो को खासी परेशानी होती है। शहरों की हालत तो बद से बदतर रहती है। पानी खरीदना पड़ता है। नगर पालिका के टैंकर वार्डो में पानी ले के जाती है, तो वहाँ महाभारत छिड़ जाता है।  एक बाल्टी पानी के लिए लोग एक दुसरे के खून के प्यासे हो जाते है। और इधर मुंसिपलिटी वाले लात तान के सोते है।

पानी की समस्या बहुत ही गंभीर समस्या है। कई जगहों तो पानी बचाओ अभियान भी चलाया जाता है। इस अभियान के तहत होली भी बिना पानी के खेलना पड़ता है। अलग-अलग समाजसेवी आगे आके लोगो को आग्रह करते है की होली में पानी की बर्बादी न करे। पता नही वो लोग कहाँ सो रहे होते है, जब गली में टूटी टोंटी वाले नल से अनवरत जल धारा गटर नदी में बहते रहती है। खुद लाखो लीटर पानी अपने कार और गाडियों को धोने जैसे उच्च कार्यो में लगा देते है।

पेड़ो का अंधाधुंध काटना भी गर्मी बढ़ने का एक कारण है। मुझे याद है जब हमारे गाँव में इतने हरे-भरे पेड़ होते थे, की दो के बाद तीसरा खेत दिखाई नही देता था। अब हालत यो है की जहाँ तक नजर दौडाओ खेत ही खेत दिखती है। आपकी हाथ की उंगलिया ही काफी होंगी पेड़ो को गिनने के लिए।

पेड़ नही तो हवा नही, हवा नही तो बादल नही, बादल नही तो बारिश नही, बारिश नही तो गर्मी ही गर्मी। जो भी हो गर्मी बढ़ने के पीछे कारण तो हम इंसान ही है। हम अपने साथ-साथ पूरी पृथ्वी में रहने वाले जीवो के जान के पीछे हाथ धो के पड़े है। थोड़ी सी बुद्धि क्या दे दी ऊपर वाले ने हम खुद को रचयिता समझने लगे। अब भुगतना तो पड़ेगा ही। गर्मी हमने लायी है तो हमें ही झेलना पड़ेगा जैसे भी हो।

इसीलिए आप सब को भी हमारी प्यारी गर्मी का मौसम की अग्रिम बधाई। “Enjoy Summer Season”

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